Powered by Blogger.

Wednesday, 12 April 2017

पड़ोसन भाभी की चुदाई करके चोदना सीखा




दोस्तो, मेरे पड़ोस में आशा नाम की महिला रहती है.. वो बहुत सेक्सी है। मैं उनको रोज देखता हूँ और सोचता हूँ कि कैसे उनकी चुदाई करूँ?

आशा जी का रोज मेरे घर आना-जाना था, मैं आशा को भाभी कह कर बुलाता था। जब मैं आशा भाभी को देखता था.. तो मेरे लंड तन जाता था। आशा भाभी अपने पति के साथ रहती थीं।

एक दिन आशा भाभी के पति को ऑफिस के काम से एक हफ्ते के लिए दिल्ली जाना था.. तो उन्होंने अपनी अकेले रहने की बात मेरी मॉम को बताई और मुझे उनके घर सोने के लिए कहा। तो मेरी मॉम ने मुझसे कहा- पड़ोस में रहने वाली भाभी के पति थोड़े दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं और तुझे वहाँ जाकर रहना होगा.. क्योंकि तेरी भाभी को अकेले बहुत डर लगता है। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

मैंने हामी भर दी।

आशा भाभी के पति दिल्ली गए, तो उस रात को मैं उनके घर चला गया। मैंने भाभी के घर पर जाकर डोरबेल बजाई तो आशा भाभी दरवाजा खोला।

भाभी ने मुझे देखा और मुस्कुरा कर कहा- आप बड़ी जल्दी आ गए!
मैंने कहा- हाँ भाभी.. मॉम ने बोला तो मैं तुरंत आ गया।
हम दोनों घर में अन्दर आ गए.. भाभी ने कहा- मुझे थोड़ा काम है.. जब तक तुम टीवी देखो, मैं अपना काम खत्म करके अभी आती हूँ।

मैं दीवान पर बैठ कर टीवी देखने लगा।

थोड़ी देर बाद आशा भाभी काम खत्म करके मेरे साथ टीवी देखने बैठ गईं और हम दोनों बातें करने लगे। मेरे मन में बार-बार यही ख़याल आ रहा था कि कब आशा भाभी की चुदाई करूँ।

रात को हम दोनों खाना खाकर सोने चले गए.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, इसलिए में टीवी देखने लगा।

रात को 12 बजे डिस्क वाले ने ब्लू फिल्म लगा दी, तो मैं वो टीवी की आवाज कम करके फिल्म देखने लगा, इस वक्त आशा भाभी सो रही थीं। फिल्म के गर्म सीन देख कर मेरा लंड तन गया और मैं उधर ही लंड निकाल कर मुठ मारने लगा। मेरे लंड का साइज भी अच्छा खासा है।

रात को इस वक्त मुठ मारते समय मेरी हल्की आवाजों से आशा भाभी की एकदम से नींद खुल गई और वो टीवी वाले रूम में आ गईं। उन्होंने मुझे मुठ मारते हुए देख लिया और टीवी में ब्लू फिल्म को भी देख लिया।

मैं डर गया और चुपचाप बैठ गया, मेरी पैंट खुली हुई थी।
आशा भाभी बोलीं- ये क्या कर रहे हो?

मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप मुँह लटका कर बैठ रहा। आशा भाभी मेरे लंड को देखती रहीं।
फिर आशा भाभी मेरे पास आईं और मेरे लंड को पकड़ कर बोलीं- कितना मोटा लंड है.. इतना तो मेरे पति का भी नहीं है।
उनकी ये हरकत देख कर मेरी हिम्मत बढ़ी.. मैं कहने लगा- भाभी ये लंड आपके लिए तैयार है!

आशा भाभी मेरे तरफ आईं और मुझे किस करने लगीं.. मैं भी उनका साथ देने लगा।

भाभी मेरे लंड को कसके पकड़े हुए थीं। वो अपना हाथ लंड की जड़ तक ले गईं जिससे लंड का गुलाबी सुपारा बाहर आ गया। बड़े आंवले की साइज का गुलाबी सुपारा देख कर भाभी हैरान रह गईं, उन्होंने पूछा- अरे बाबा..! इसे कहाँ छुपा रखा था इतने दिन तक?
मैंने कहा- भाभी यहीं तो था तुम्हारे सामने.. लेकिन तुमने ध्यान ही नहीं दिया।
भाभी बोलीं- मुझे क्या पता था कि तुम्हारा लंड इतना बड़ा होगा..!

जब उन्होंने ‘लंड’ कहा, तो मुझे उनकी बिंदास बोली पर हैरानी हुई और साथ ही में बड़ा मज़ा भी आया।

वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खींचते हुए सहला रही थीं और बीच-बीच में कस-कस कर दबाते हुए मसल भी रही थीं। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

फिर भाभी ने अपना पेटीकोट अपनी कमर के ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जाँघों के बीच ले कर रगड़ने लगीं। वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गईं ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सकें।

उनकी चूचियां मेरे मुँह के बिल्कुल पास थीं और मैं भाभी की चूचियों को कस-कस कर दबा रहा था।

अचानक उन्होंने अपनी एक चूची मेरे मुँह में ठेलते हुए कहा- लो इनको मुँह में लेकर चूसो!

मैंने भाभी की एक चूची अपने मुँह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिए मैंने उनकी चूची को मुँह से निकाला और बोला- भाभी मैं हमेशा तुम्हारे ब्लाउज में कसी इन चूचियों को देखता था और हैरान होता था, मुझे इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी। मेरा दिल करता था कि इन्हें मुँह में लेकर चूसूं और इनका रस पी जाऊँ, पर डरता था.. पता नहीं तुम क्या सोचोगी और कहीं मुझसे नाराज ना हो जाओ। तुम नहीं जानती भाभी कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है।

भाभी ने कहा- अच्छा.. तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, मेरी चूचियों को जी भर कर दबाओ, चूसो और मजा ले लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ.. जैसा चाहे, वैसा कर लो!

बस फिर क्या था.. भाभी की हरी झंडी पाकर मैं भाभी की रसीली चूचियों पर टूट पड़ा। मेरी जीभ उनके कड़े निप्पलों को टटोल रही थी.. मैंने अपनी जीभ को भाभी के उठे हुए कड़क निप्पल पर घुमाया.. साथ ही मैंने भाभी के दोनों अनारों को कसके पकड़ा हुआ था और बारी-बारी से उन्हें चूस रहा था।

मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था, जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.. उनके मुँह से ‘ओह.. ओह.. आह..’ की आवाज निकल रही थी।

मेरी गर्लफ्रेंड मुह और चुत चुदवाती लेकिन गांड में नहीं लेती


मुझसे पूरी तरह से सटी हुई वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थीं और मरोड़ रही थीं।

उन्होंने अपनी एक टांग को मेरे टांग के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जाँघों के बीच ले लिया। मुझे उनकी जाँघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ.. यह भाभी की बुर थी।

भाभी ने पेंटी नहीं पहन रखी थी और मेरा लंड का सुपारा उनकी झांटों में घूम रहा था। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था.. मैं भाभी से बोला- भाभी मुझे कुछ हो रहा है और मैं अपने आपे में नहीं हूँ.. प्लीज मुझे बताओ, मैं क्या करूँ?
भाभी बोलीं- तुमने आज तक कभी किसी लड़की को चोदा है?
मैंने बोला- नहीं..

भाभी मेरे लंड को अपनी जांघों में दबाते हुए और मुझे चूमते हुए इठला कर बोलीं- च..च्च.. कितने दुख की बात है.. कोई भी लड़की इस जैसे लंड को देख कर कैसे मना कर सकती है.. शादी तक ऐसे ही रहने का इरादा है क्या?

मैं क्या बोलता.. मेरे मुँह में कोई शब्द नहीं थे.. मैं चुपचाप उनके चेहरे को देखते हुए उनकी चूचियों को मसलता रहा। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

उन्होंने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोलीं- अपनी भाभी को चोदोगे?
‘हाँ भाभी क..क्यों नहीं..!’ मैं बड़ी मुश्किल से कह पाया, मेरा गला सूख रहा था।

वो बड़े मादक अंदाज में मुस्कुरा दीं और मेरे लंड को आज़ाद करते हुए बोलीं- ठीक है.. लगता है अपने अनाड़ी देवर राजा को मुझे ही सब कुछ सिखाना पड़ेगा.. पर गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना.. चलो अपनी चड्डी उतार कर पूरे नंगे हो जाओ।

मैं पलंग से नीचे उतर गया और अपना अंडरवियर उतार दिया। मैं अपने तने हुए लंड को लेकर नंगधड़ंग अपनी भाभी के सामने खड़ा था।

भाभी मेरे खड़े लंड को अपने रसीले होंठों को अपने दाँतों में अश्लील भाव से दबा कर देखती रहीं और फिर अपने पेटीकोट का नाड़ा खीच कर ढीला कर दिया।
‘भाभी तुम भी इसे उतार कर नंगी हो जाओ ना!’

यह कहते हुए मैंने उनका पेटीकोट को खींचा.. भाभी ने अपने चूतड़ ऊपर कर दिए, जिससे कि पेटीकोट उनकी टांगों से उतर कर अलग हो गया। भाभी अब पूरी तरह नंगी हो कर मेरे सामने चित्त पड़ी हुई थीं।

भाभी ने किसी पेशेवर रंडी की तरह अपनी टांगों को फैला दिया और मुझे रेशमी झांटों के जंगल के बीच छुपी हुए उनकी रसीली गुलाबी नंगी चुत का नज़ारा देखने को मिला।

नाइट लैम्प की हल्की रोशनी में चमकते हुए नंगे जिस्म को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लंड मारे खुशी के झूमने लगा।

भाभी ने अब मुझसे अपने ऊपर चढ़ने को कहा.. मैं तुरंत उनके ऊपर चढ़ कर लेट गया और उनकी चूचियों को दबाते हुए उनके रसीले होंठ चूसने लगा। भाभी ने भी मुझे कस कर अपने आलिंगन में कस कर जकड़ लिया और चुम्मा का जवाब देते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ को ठेल दिया।

हाय क्या स्वादिष्ट और रसीली जीभ थी..
मैं भी भाभी की जीभ को जोर-जोर से चूसने लगा.. हमारा चुम्मा पहले पहले प्यार के साथ हल्के-हल्के हो रहा था और फिर पूरे जोश के साथ होने लगा। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे, फिर मैं अपने होंठ भाभी के नर्म और नाज़ुक गालों पर रगड़-रगड़ कर चूमने लगा।

अब भाभी ने मेरी पीठ पर से हाथ ऊपर लाकर मेरा सर पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ ठेला.. मैं अपने होंठ उनके होंठों से उनकी ठोड़ी पर लाया और कंधों को चूमता हुआ चूचियों पर पहुँचा। मैं एक बार फिर उनकी चूचियों को मसलता हुआ और उनसे खेलता हुआ काटने और चूसने लगा।

उन्होंने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और हमारी टांगें एक-दूसरे से दूर हो गईं। अपने दाएँ हाथ से वो मेरा लंड पकड़ कर उसे मुट्ठी में लेकर सहलाने लगीं और अपने बाएँ हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकड़ कर अपनी टांगों के बीच ले गईं। जैसे ही मेरा हाथ उनकी चुत पर पहुँचा.. उन्होंने मेरी उंगली से अपनी चुत के दाने को ऊपर से रगड़वा दिया।

समझदार को इशारा काफ़ी था.. मैं उनकी चूचियों को चूसता हुआ उनकी चुत को रगड़ने लगा।

‘राजा अपनी उंगली अन्दर डालो ना!’ ये कहते हुए भाभी ने मेरी उंगली अपनी चुत के मुँह पर दबा दिया। मैंने अपनी उंगली को उनकी चुत की दरार में घुसा दिया और वो पूरी तरह अन्दर चली गई।

जैसे-जैसे मैंने उनकी चुत के अन्दर घुमाई.. मेरा मज़ा बढ़ता गया। जैसे ही मेरा उंगली उनकी चुत के दाने से टकराई.. उन्होंने जोर से सिसकारी लेकर अपनी जाँघों को कस कर बंद कर लिया और चुत उठा-उठा कर मेरी उंगली को ही चोदने लगीं, उनकी चुत से पानी बह रहा था।

थोड़ी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैंने अपनी उंगली को उनकी चुत से बाहर निकाल लिया और सीधा होकर उनके ऊपर लेट गया।
भाभी ने अपनी टाँगें फैला दीं और मेरे फरफ़राते हुए लंड को पकड़ कर सुपारा अपनी चुत के मुहाने पर रख लिया। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

उनकी रेशमी झांटों का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था।

फिर भाभी बोलीं- अब अपना लंड मेरी बुर में घुसाओ.. प्यार से घुसेड़ना नहीं तो मुझे दर्द होगा.. अहह!

क्योंकि मैं नौसीखिया था, इसीलिए शुरू-शुरू में मुझे अपना लंड उनकी टाइट चुत में घुसेड़ने में काफ़ी परेशानी हुई। मैंने जब जोर लगा कर अपना मूसल लंड भाभी की चुत के अन्दर ठेलना चाहा तो उन्हें भी दर्द हुआ, लेकिन पहले से उंगली से चुदवा कर उनकी चूत काफ़ी गीली हो गई थी इसलिए चुत में रस बहुत अधिक था और चुत एकदम चिकनी हो गई थी।

उधर भाभी भी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थीं और सही रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के में सुपारा चुत की दरार के अन्दर फंस गया। इससे पहले की भाभी संभलतीं या आसान बदलतीं, मैंने दूसरा धक्का लगा दिया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चुत की जन्नत में दाखिल हो गया।

भाभी चिल्लाईं- उईईइ.. ईई..ई माँआआ..उ म्म्ह… अहह… हय… याह… फाड़ दी.. उहुहुहह ओह बाबा.. ऐसे ही रहना कुछ देर.. आह्ह.. हिलना-डुलना नहीं.. हय बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड.. मुझे तो मार ही डाला तुमने देवर राजा..!

भाभी को काफ़ी दर्द हो रहा था.. लगता था कि भाभी पहली बार किसी इतने मोटे और लम्बे लंड से चुद रही थीं। मेरा मूसल भाभी की बुर में जड़ तक घुसा हुआ था। मैं अपना लंड उनकी चुत में घुसा कर चुपचाप पड़ा हुआ था।

भाभी की चुत फड़क रही थी और अन्दर ही अन्दर मेरे लंड को मसल रही थी। इसका अहसास मेरे गुर्राते हुए लंड को खूब हो रहा था। उनकी उठी-उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।

मैंने हाथ बढ़ा कर भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और एक को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। भाभी को इससे कुछ राहत मिली और अब उन्होंने कमर हिलानी शुरू कर दी।

भाभी मुझसे बोलीं- बाबा शुरू करो.. चोदो मुझे.. ले लो मज़ा जवानी का मेरे राज्ज्ज्जा..

भाभी अपनी गांड हिलाने लगीं.. मैं ठहरा अनाड़ी.. समझ ही नहीं पाया कि अब और कैसे शुरू करूँ।

पहले मैंने अपनी कमर को ऊपर किया तो लंड चुत से बाहर आ गया। फिर जब नीचे किया.. तो ठीक निशाने पर नहीं बैठा और भाभी की चुत को रगड़ता हुआ नीचे फिसल कर गांड में जाकर फँस गया। मैंने दो-तीन धक्के लगाए.. पर लंड चुत में अन्दर जाने के बजाए फिसल कर गांड की दरार में चला जाता।

भाभी से रहा नहीं गया और तिलमिला कर कर ताना देती हुई बोलीं- अनाड़ी का चोदना और चुत का सत्यानाश.. अरे मेरे भोले राजा, जरा ठीक से निशाना लगा कर पेलो.. नहीं तो चुत के ऊपर लंड रगड़-रगड़ कर झड़ जाओगे!

मैं बोला- भाभी अपने इस अनाड़ी देवर को कुछ सिख़ाओ, जिंदगी भर तुम्हें गुरु मानूँगा और लंड की मलाई की दक्षिणा भी दूँगा।
भाभी लंबी सांस लेती हुई बोलीं- हाँ बाबा, मुझे ही कुछ करना होगा.. नहीं तो देवरानी आकर कोसेगी कि तुम्हें कुछ नहीं सिखाया।

उन्होंने मेरा हाथ अपनी चूची पर से हटाया और मेरे लंड पर रखते हुए बोलीं- इससे पकड़ कर मेरी चुत के मुँह पर रखो और लगाओ धक्का जोर से!

मैंने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चुत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अन्दर चला गया।
फिर भाभी बोलीं- अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन पूरा नहीं.. सुपारा अन्दर ही रहने देना और फिर दोबारा पूरा लंड अन्दर पेल देना, बस इसी तरह से मेरी चुत की चुदाई करते रहो।

मैंने वैसे ही करना शुरू किया और मेरा लंड धीरे-धीरे उनकी चुत में अन्दर-बाहर होने लगा। फिर भाभी ने स्पीड बढ़ा कर चुदाई करने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अन्दर-बाहर करने लगा। भाभी को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर शॉट का जवाब देने लगीं।

लेकिन ज्यादा स्पीड होने से बार-बार मेरा लंड बाहर निकल जाता.. इससे भाभी की चुदाई का सिलसिला टूट जाता। आख़िर भाभी से रहा नहीं गया और करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से उतार दिया और मुझको चित्त लेटा कर वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं।

भाभी ने अपनी जाँघों को लंड के दोनों बगलों में फैला कर अपने गद्देदार चूतड़ मेरी जाँघों पर रखकर बैठ गईं। उनकी चुत मेरे लंड पर टिकी थी और हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थीं।

भाभी बोलीं- मैं दिखाती हूँ कि कैसे चोदते हैं।
यह कहते ही भाभी ने लंड को चुत की दरार में फिट किया और मेरे ऊपर लेट कर एक तेज धक्का लगाया, मेरा लंड ‘घाप..’ से भाभी की चुत के अन्दर दाखिल हो गया।
यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

भाभी ने अपनी रसीली चूचियाँ मेरी छाती पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और मेरे मुँह में जीभ को ठेल दिया।

फिर भाभी ने मज़े से कमर हिला-हिला कर शॉट लगाना शुरू किया। भाभी बड़े कस-कस कर शॉट लगा रही थीं। मेरी प्यारी भाभी की चुत मेरे लंड को अपने में समाए हुए तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ।

कोई दस मिनट की तगड़ी धकापेल के बाद भाभी झड़ गईं और मेरी छाती पर ही ढेर हो गईं। मुझे समझ आ गया कि भाभी का खेल खत्म हो गया।

मैंने उन्हें सहलाया पर अभी मेरा नहीं हुआ था तो मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही थी।

एक मिनट बाद भाभी मेरे ऊपर से उठीं तो मेरे लंड एकदम खड़ा था.. भाभी ने अपने पेटीकोट से लंड को पोंछा और उसे मुँह में ले लिया।

अब मुझे मजा आने लगा.. कुछ ही देर में भाभी ने मेरी गोटियों को भी सहलाना शुरू कर दिया तो मेरा झरना फूट पड़ा।

भाभी ने पूरा माल अपनी चूचियों पर ले लिया और हम दोनों तृप्त हो कर निढाल लेट गए। कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने आपको साफ़ किया और सो गए।

एक हफ्ते मैं तो भाभी ने मुझे पूरा चुदक्कड़ बना दिया था।

आपको मेरी यह हिंदी सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. प्लीज़ मुझे ईमेल कीजिएगा।

Continue Reading »

स्टेशन के वेटिंग रूम में मस्त भाभी की चुदासी चुत की चुदाई



दोस्तो.. मेरा नाम वरुण है, मैं दिल्ली में रहता हूँ, सेक्सी स्टोरी की इस हिंदी की साईट के आप सभी पाठकों को मेरा प्यार!

आज मैं आपको अपनी पहली सेक्स स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ, पसंद आई या नहीं, रिप्लाई करना मुझे ख़ुशी होगी।

बात दिसंबर 2014 की है.. मेरे रूम के ऊपर एक भैया और भाभी रहते हैं, उनके बच्चे नहीं हैं। भाभी के पति कहीं जॉब करते हैं। एक बार भाभी को अपने घर जाना था, भैया को छुट्टी नहीं मिल रही था, जिससे वो बहुत परेशान थीं।

एक दिन भाभी मुझसे बात करने लगीं- मुझे घर जाना है और तुम्हारे भैया को छुट्टी नहीं मिल रही है।

भाग्यवश मुझे भी काम से भाभी के शहर जाना था, तो मैंने कह दिया- मेरे साथ चली चलो.. कल मुझे भी जाना है।
उन्होंने कहा- ठीक है मैं तुम्हारे भैया से पूछ लेती हूँ।

उन्होंने भैया से परमिशन ले ली और अगले दिन मैं उनके साथ चल दिया।

मौसम में ठंड के साथ सड़क पर कोहरा भी बहुत था.. कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था। हम दोनों जैसे-तैसे स्टेशन पहुँचे, ट्रेन सुबह 7 बजे की थी। मैंने अपना रिज़र्वेशन तो पहले ही करवा लिया था.. पर भाभी का टिकट वेटिंग का था। इसलिए किसी तरह हम दोनों एक सीट में ही अड्जस्ट हो गए।

भाभी दिखने में बहुत मस्त और हॉट हैं, उनकी जवानी गदराई हुई है.. चुची भी बड़ी-बड़ी हैं.. पतली कमर और भी मस्त दिखती हैं। उनके चूतड़ भी बहुत ठोस और मस्त हैं.. जब भाभी चलती हैं तो उनका पूरा इलाका हिलता है। भाभी के लंबे-लंबे बाल उनके चूतड़ों पर नागिन से लहराते हैं। उनकी हाइट 5’6″ नशीले होंठ.. जब भी उनको देखता था तो मेरा तो लंड झट से खड़ा हो जाता था।

आज भाभी के साथ बैठने का मौका मिला था।
ट्रेन चल दी.. हम दोनों ऊपर की सीट पर बैठे थे.. सब ठंड से काँप रहे थे।
मैंने कहा- भाभी जी ठंड बहुत है.. कुछ ओढ़ लो!

मैंने कम्बल निकाला और ओढ़ लिया तो भाभी बोलीं- हाँ ठंड ज्यादा है.. मैं भी इसी में घुस जाती हूँ.. अपने सामान में से कम्बल कौन निकालेगा.. इसी से मैं भी काम चला लूँगी।
मैंने कहा- ठीक है..

हम दोनों एक ही कम्बल में बैठ गए।
मैंने भाभी से मजाक करते हुए पूछा- अगर भैया ऐसे हम देख लेंगे तो?
भाभी मुस्कुराई और उन्होंने कहा- तो क्या हुआ!
मैं- भाभी आपसे एक बात कहूँ.. बुरा तो नहीं मानोगी!

ट्रेन अपनी रफ्तार में चल रही थी।
भाभी- क्या बोलना चाहते हो बोलो.. मैं बुरा क्यों मानूँगी!
मैं- सच में आप बहुत सुंदर और..

मैं कहते कहते रुक गया तो भाभी ने हंसते हुए पूछा- और.. क्या?
मैं- जाने दो.. आप बुरा मान जाओगी.. मुझे शर्म आती है।
भाभी- बोलो ना.. नहीं तो अब मैं जरूर नाराज़ हो जाऊँगी!
मैं- आप बहुत सेक्सी और हॉट हैं।
भाभी हंसते हुए कहने लगीं- हट शैतान कहीं के.. तुम्हारे भैया को तो मेरी परवाह ही नहीं रहती.. उन्हें तो मुझे देखने की ही फुरसत ही नहीं रहती और तुम तारीफ कर रहे हो।

मेरी हिम्मत बढ़ गई.. मैं समझ गया कि भाभी को लंड चाहिए.. ये प्यासी हैं तो मैंने उनके हाथ को टच किया।
वो कुछ नहीं बोलीं.. मैंने कहा- भाभी आपके हाथ कितने मुलायम हैं।

ट्रेन तेज रफ्तार के कारण हिल रही थी तो हम दोनों के शरीर भी टच हो रहे थे।

जब मेरी कोहनी का दबाव भाभी की चुची पर होता तो वो मुस्कुरा देती थीं। मैंने कम्बल के अन्दर से उनको पीछे से कमर में हाथ रख कर पकड़ लिया, तो वो हंसने लगीं।

मैंने कहा- भाभी बुरा तो नहीं लगा!
उन्होंने कहा- बुरा कैसा.. कम्बल के अन्दर ही तो है.. कोई नहीं देखेगा, वैसे तुम भी पूरे नॉटी हो!

उनका इतना कहना था कि मैं और सट कर बैठ गया और उनको पकड़ लिया। भाभी को जैसे ही पकड़ा कि मेरा लंड उफान मारने लगा और मैं भी हॉट होने लगा।

अब मैंने अपने दूसरे हाथ को उनकी जाँघों के ऊपर रख दिया.. वो कुछ ना बोलीं।

फिर मैं उनकी कमर को सहलाने लगा, तो भाभी ने अपने सिर को मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे दूसरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर अपनी जाँघों के ऊपर दबाने लगीं।

मैं भाभी की मरमरी जाँघों को सहलाने लगा.. वो भी हॉट होने लगीं और मेरे कान में बोलीं- आराम से सहलाते रहो.. अच्छा लग रहा है।

मैं उनकी कमर और पीठ में हाथ फेरने लगा और दूसरे हाथ से भाभी की साड़ी को ऊपर सरका कर उनकी नंगी जाँघों को सहलाने लगा, तो उन्होंने मेरे लंड पर हाथ रख दिया और मेरा लंड सहलाने लगीं।

उनके हाथ लगते ही मेरा लंड कोबरा सांप की तरह फनफ़नाने लगा। मैंने अपने एक हाथ को उनके मम्मों पर धर दिया और मम्मों को मसलने लगा। भाभी गनगना गईं तो मैंने दूसरे हाथ से उनकी चुत को भी रगड़कर खेल शुरू कर दिया। उनकी साँसें तेज हो रही थीं।

अगले ही पल भाभी मेरी पैंट की ज़िप खोलने लगीं और मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगीं।

मैंने भाभी की मदद करते हुए ज़िप खोली और पैंट का बटन भी खोल दिया। मेरा लंड भाभी के हाथ से टच हुआ तो सच में बहुत मजा आने लगा। भाभी ने हाथों में मेरा लंड पकड़ा और सहलाने लगीं।

मैं भाभी की चुत टटोलने लगा था.. चुत पर हल्के-हल्के बाल थे.. और उनकी चुत गीली होने लगी थी।

मैं नंगी चुत सहलाए जा रहा था.. इधर मेरे लंड से भी पानी आ रहा था। भाभी मेरे लंड के इसी पानी को लंड पर रगड़ कर मसल रही थीं। उधर मैं उनकी चुत में उंगली कर रहा था.. थोड़ी देर में भाभी झड़ गईं और उसी वक्त मेरा भी जूस बाहर आ गया.. लंड पिचकारी छोड़ने लगा।

हम दोनों ही शांत हो गए थे। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने अपने कपड़े कम्बल के अन्दर ही ठीक किए और बाथरूम गए। कुछ देर बाद हम दोनों फ्रेश होकर वापस आए। हम लोगों की ट्रेन देर रात ग्यारह-बारह तक बजे पहुँचने वाली थी, तो घर जाना सुबह ही हो पाता। ठंड के कारण ट्रेन लेट भी चल रही थी, ये सब सोच कर मैंने पहले ही स्टेशन में रूम बुक करा दिया था।

मैंने कहा- भाभी रात को वहीं रूम में रुक जाएँगे.. आप भैया को बता देना कि ट्रेन लेट हो गई थी.. तभी तो अपनी चुदाई हो पाएगी।

उन्होंने कहा- अब तो तुम्हारा लंड लिए बिना नहीं मानूँगी। तुम्हारा बहुत बड़ा और मस्त है.. तुम मेरी चुत को फाड़ देना.. मैं बहुत प्यासी हूँ। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

रात को हम लोग 11:30 बजे पहुँचे.. रूम में फ्रेश होकर थोड़ा खाना खाया और मैंने अपने कपड़े उतार दिए, भाभी साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट गईं।

बहुत ठंड हो गई थी.. मैंने पूरा रूम पैक कर दिया और कहा- भाभी अब और मत तरसाओ.. मैं तड़प रहा हूँ।
उन्होंने भी बाँहें फैलाते हुए कहा- मैं भी तड़प रही हूँ राजा.. आओ मुझे चोद दो.. मेरी चुत तुम्हारे मोटे लंड की प्यासी है।

मैंने भाभी को बिस्तर पर चित्त लिटा कर बांहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने और चूसने लगा। वो भी पूरा साथ देने लगीं और मुझे चूमने लगीं।
मैं अपनी जीभ को उनके मुँह में डाल कर चूस रहा था और भाभी की चुची को भी मसल रहा था।

भाभी की साँसें तेज़ हो रही थीं.. अब मैं भाभी की गर्दन गाल और कानों को बेतहाशा चूमने और चाटने लगा और उनकी मदमस्त चुची को अपने हाथों में भर कर मसलने लगा।

कुछ ही देर में हम दोनों बहुत गरम हो गए और मैंने उनके ऊपर चुदाई की पोजीशन में चढ़ कर अपने लंड को उनकी नंगी चुत की फांकों में लगा दिया।
कुछ पल लंड के सुपारे को भाभी की चूत को पेटीकोट के ऊपर से ही रगड़ने लगा.. वो चुदास से सीत्कारने लगीं और बोलीं- आअहह बहुत मजा आ रहा है.. तू तो बहुत मस्त चुदाई करना जानता है और रगड़ मुझे!

मैं भी हॉट हो गया था.. मैंने उनके ब्लाउज को खोला.. ब्रा में फंसी उनकी चूचियां और भी मस्त लग रही थीं। मैं ब्रा के ऊपर से दूध की टोंटी चूसने लगा और दांतों से काटने लगा.. भाभी कामुक सिसकारियां निकालने लगीं।

मैंने ब्रा को भी खोल दिया, उनके पेटीकोट को भी खींच कर हटा दिया। अब भाभी पिंक पेंटी में बहुत सेक्सी लग रही थीं। मैं उनकी नंगी चुची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

आहह क्या सफेद रसगुल्ले थे, पर साइज़ खरबूजे जैसे थे.. कुछ भी हो, बड़ी रसीली चुची थी।
भाभी कामुकता से मचल रही थीं- उईईईईई माँआआ.. आहह और चूसो..

मैं- आआहह सच भाभी बड़ी मस्त चुची हैं.. उफ्फ़ भाभी- हाँ.. आह.. चूस लो.. उईईईई चूत भी सहलाओ राजा.. आह्ह.. यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

मैं अपने हाथों से भाभी की चुची को दबा रहा था और नीचे को होकर उनकी नाभि को चूसने लगा। नाभि और पेट को चूसते चूमते मैंने दाँतों से पकड़ कर भाभी की पेंटी को भी खींच दिया।

आह्ह.. सच में क्या चुत थी साली की.. एकदम पकौड़ा सी फूली.. मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गईं.. चुत पर हल्के रेशमी बाल थे। मैंने झट से अपने मुँह को नंगी चुत पर लगाया और चुत चाटना शुरू कर दिया। साथ ही अपने हाथों से भाभी की चुत को फैला कर चुत के बीच में जीभ से चाटने लगा।

भाभी ने भी अपनी चूत पसार दी और सिसियाने लगीं- आहह उईसस्स.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… बहुत मजा आ रहा है रे.. ऊह.. ऊओह ईई.. चाट लो.. आह्ह.. और चाटो ओह्ह..

और वो अति उत्तेजना में भूखी कुतिया की तरह आँखें फाड़ कर मुझे घूर कर चिल्लाने लगीं- चोद दे हरामी.. मत तड़पा मादरचोद..
मैं- रुक साआली.. अभी तो शुरूआत है, ऐसा चोदूंगा.. सब लंड भूल जाएगी बहनचोदी..!

भाभी मेरे बालों को पकड़ कर अपनी नंगी चुत पर रख कर दबाने लगीं। मैं भाभी की चूत चाटे जा रहा था.. अब वो चुदास से भड़क कर एकदम हॉट हो चुकी थीं।

मैंने 69 में होकर अपना लंड उनके मुँह में डाला और मुँह चोदने लगा.. वो भी गपागप मेरा लंड बड़े आराम से चूसने लगीं।
भाभी- उम्म्म्म.. उफफ्फ़..
मैं- आहह यस भाभी.. और चूसो बहुत मज़ा आ रहा है.. सच में तू तो मस्त रंडी है.. चूस साली..
भाभी- अब चोद भी दो ना भोसड़ी के.. मुझसे रहा नहीं जा रहा है.. मेरी चुत फाड़ दो.. प्लीज़.. जल्दी चोदो.. ओह..

मैंने उनको लेटा दिया और उनकी टांगें फैला कर अपने लंड के सुपारे को नंगी चुत के मुँह पर टिका दिया। अब मैं चुत के बीच में लंड को ऊपर से ही रगड़ने लगा.. इससे वो और ज्यादा पागल हो गईं और नीचे से अपनी गांड उछालने लगीं।

भाभी- चोद दे हरामी.. चोद ना आआहह.. इससस्स बड़ा मस्त लंड है मादरचोद साले.. घुसेड़ दे..
मैं- ऐसा चोदूंगा कि याद रखेगी रंडी साली हरजाई.. एक बार पूरा लंड चुत में डाल दूँगा तो साली रोज़ माँगेगी.. ले..
भाभी- प्लीज़.. जल्दी करो.. चुत पानी चोद रही है.. आह्ह.. पूरी गीली हो गई है राजाआअ.. आआहह..

मैं अपने लंड का सुपारा नंगी चुत की फांकों में फंसाने लगा.. भाभी की चुत गीली तो थी ही.. थोड़ा सा ही झटका मारा कि आधा लंड भाभी की रसीली चुत में सरक गया।

भाभी- अहह प्लीज़ धीरे डाल.. बहुत मोटा है तेरा..!

मैंने उनकी टाँगों को फैला दिया और सेंटर में आकर और एक झटका मारा.. तो लंड पूरा जड़ तक अन्दर घुस गया और वो चिल्ला पड़ीं- आआआहह उईई.. मर गई मादरचोद.. बहुत बड़ा है!

‘भोसड़ीवाली कमीनी.. ले लंड.. बहुत चिल्ला रही थी भैन की लौड़ी.. अब मज़ा दिखाता हूँ..!’

मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।

भाभी- आआहह.. आअहह आआहह उईईई यस और चोद साले..!
मैं- ले हरामजादी.. लंड खा.. यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

मेरा लंड भाभी की चुत में पूरा अन्दर तक झटके मार रहा था और मैं अपनी गांड उछाल-उछाल कर भाभी को चोद रहा था।

चुदाई की मदमस्त आवाजों से पूरा रूम गूँज रहा था, ये चुदाई 20 मिनट तक चलती रही.. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थीं और मैं उनकी चुदाई में मस्त था।

अचानक उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और एकदम से चिल्लाते हुए झड़ गईं।
मैं अब भी भाभी को चोदे जा रहा था। भाभी ने होते हुए अपने हाथ-पैर फैला दिए।

थोड़ी देर में मैं भी उनकी चुत में ही झड़ गया और मेरा लंड चुत में माल की पिचकारियां छोड़ने लगा।

कुछ पल में मैं शांत हो गया.. इसके बाद हम दोनों लगभग आधे घंटे यूं ही पड़े रहे.. और ऐसे ही सो गए।

इसके बाद तो भाभी का मैं पसंदीदा चोदू बन गया था और जब भी मौका मिलता है.. मैं भाभी को हचक कर चोदता हूँ। वो भी चुत चुदवाने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।

दोस्तो, आपको मेरी सेक्स स्टोरी पसंद आई? मुझे जरूर रिप्लाइ करना।

Continue Reading »

Wednesday, 5 April 2017

हम दोनों ने चुदाई का भरपूर मजा लूटा



हैलो साथियो.. मेरा नाम सौरभ है, मैं यमुननगर, हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं हिंदी सेक्स स्टोरी की इस साइट पर पिछले 3 साल से कहानियां पढ़ रहा हूँ। मेरी हाइट 5 फुट 11 इंच है, रंग गोरा है। बहुत अधिक न कहूँ तो कुल मिला कर किसी भी लड़की को चोदने के लिए एक परफ़ेक्ट लड़का हूँ।

एक दिन मैं फ़ेसबुक पर एक लड़की से बात करने लगा, लगभग एक हफ्ते तक बात करने के बाद उसने मुझे अपना नम्बर दे दिया। अब हम दोनों फोन पर बात करने लगे थे।

कुछ दिन बाद हम दोनों ने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने के लिए सोचने लगा। फिर वो दिन आ ही गया, जब मुझे उससे मिलना था। वो मिलने आई तो उस दिन मैंने उसे पहली बार सामने देखा था, वो बहुत सुंदर थी। उस दिन वो ब्लू सूट में कहर ढा रही थी.. एकदम पटाखा.. तबाही!
मेरी गर्लफ्रेंड का नाम साक्षी है और वो भी यहीं यमुननगर में पढ़ती थी.. पर हमारा कॉलेज अलग था।

हम दोनों ने डोमिनोज में पिज़्ज़ा खाया। वो मेरी फर्स्ट डेट थी.. पर मुझको कुछ भी नहीं मिला। इसके बाद हम दोनों ने दुबारा मिलने पर मूवी देखने का प्लान बनाया।

उस दिन हम दोनों मूवी देखने चले गए और वहां हम दोनों ने एक दूसरे के साथ बहुत मस्ती की, बहुत सारी किस कीं, इस सबमें हम दोनों पूरी तरह आउट ऑफ कंट्रोल हो गए थे।
यह एक पब्लिक प्लेस था तो थोड़ा कंट्रोल करके हम वहां से वापिस आ गए।

इसी तरह हम दोनों बार बार मिलते रहे, कभी किसी रेस्तरां में मिलते..कभी पार्क में गलबहियां कर लेते, पर कभी उसको चोदने का मौका नहीं मिला।
उसके चूचे मुझको बहुत पसंद थे.. मेरा दिल करता था कि उनको पकड़ कर खूब चूसूँ।

फिर उसके घर वालों ने उसकी शादी की फिक्स कर दी.. जो कि हम दोनों को अच्छा नहीं लगा.. उसने कहा कि वो शादी से पहले तुम्हारी होना चाहती हूँ। मेरी भी उसकी सील तोड़ने की इच्छा थी।

शादी से एक हफ्ते पहले वो मेरे साथ मेरे रूम में आई.. वहां भी हम सेक्स नहीं कर पाए.. उसकी तो शादी के बाद चुदाई हो गई होगी, पर मेरी प्यास अधूरी रह गई।

उसकी शादी हो गई लेकिन उसने वादा किया था कि पहली बार वो मेरे साथ सेक्स करेगी, अपने पति के साथ सेक्स नहीं करेगी। उसने अपना वायदा पूरा किया, अपनी सुहागरात पर भी पति से सेक्स नहीं किया।

वो पहली विदाई के बाद वापिस अपने घर आ गई, लेकिन यहाँ से मेरे ज़िंदगी ने एक नया मोड़ ले लिया। शादी के बाद उसने और भी आग लगा दी.. हम दोनों ने एक खाली पड़े ढाबे की बिल्डिंग में जाने का सोचा, इधर किसी की निगाह नहीं जाती थी, शहर से दूर ये स्थान मेरी नजर में बहुत दिन से था। हम दोनों वहां चले गए।

शायद वो मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा टाइम था। हम दोनों किस करने लगे, दस मिनट किस करने के बाद जब मेरा लंड उसकी चूत में जाने के लिए तन गया तो मैंने उसका कुर्ता उतारा और उसके चूचों को दबाने लगा और उनको ब्रा से आज़ाद कर दिया।

उसके तने हुए चूचे सामने देख कर मैं पूरा आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था। मैं बड़ी बेदर्दी से उसके चूचों को दबाए जा रहा था।

मैंने उसको वहां बनी सिमेंट की बेंच पर लेटा दिया। अब मैंने उसकी लैगी उतार दी और पेंटी भी खींच दी। उसकी चुत पूरी गर्म थी और पनिया चुकी थी।

उसने मुझे अपनी टाँगों के बीच में ले लिया और मैंने अपना लंड उसकी चूत पर टिका दिया। फिर मैं लंड को चूत पर रगड़ने लगा.. तो वो भी मचलने लगी।

मैं भी पूरा चुदास में भरा हुआ था, मैंने उसकी चूत पर लंड रख कर झटका मारा, तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया।
वो चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ तो मैंने उसका मुँह दबा लिया और एक और झटका मार दिया।

अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस चुका था.. वो बेंच पर पड़ी तड़फ रही थी.. मैं उसको किस करने लगा और चूत में झटके मारने लगा।

कुछ ही देर की चुदाई में वो झड़ गई उसके कुछ देर बाद ही मैं भी झड़ गया।

कुछ समय रुक कर हम दोनों ने चुम्बन आदि किए और 20 मिनट के बाद मैंने दुबारा से उसकी चूत में लंड पेल दिया।

हालांकि वो अब भी दर्द के मारे कराह रही थी। लेकिन मैंने दर्द की चिंता किए बिना उसकी चूत में पूरा लंड डाल दिया। कुछ ही देर में हम दोनों ने चुदाई का भरपूर मजा लूटा और झड़ने के बाद हम वहां से चले आए।

अगले दिन हम फिर वहां अपने साथ एक पतला कम्बल लेकर आए और बेंच पर कम्बल बिछा कर कर बेड बना लिया, वहां हम दोनों लेट गए।

मैंने उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिए। वो मेरे लंड की भूखी थी, मैं उसकी चूत का प्यासा था। बस फिर क्या था.. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और फिर उसकी चूत में लंड पेल कर उसे किस करने लगा।

आज हम दोनों ने खुल कर पूरा मजा किया। इसके बाद तो जैसे वो मेरे लंड की मुरीद हो गई थी।

अब हम जब भी अपने मायके आती है.. तो हम दोनों खूब सेक्स करते हैं।

आप सबको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. मुझे मेल कीजिएगा।
Continue Reading »

स्टूडेंट ने चूत चुदाई - मेरे पति की चुदाई कहानी

दोस्तो, मेरा नाम रीमा राज गर्ग है, मैं आपको अपनी कहानी बताना चाहती हूँ।
मैंने मस्ताराम.नेट पर बहुत सी कहानी पढ़ी हैं तो सोचा क्यों ना मैं भी अपनी कहानी शेयर करूँ।

यह कहानी मेरे पति राज गर्ग की हैं, उन्होंने मुझे एक बार यह घटना सुनाई थी। उन्ही के शब्दों में आपको पेश करती हूँ। मैं आपको बता दूँ कि मैं भी देखने में सेक्सी हूँ, मेरा फिगर 34-28-36 है, मेरे पति मेरी चुदाई अच्छी तरह करते हैं, पूरा बदन तोड़ देते हैं ठुकाई करके उनका लंड काफ़ी लंबा मोटा है जो किसी भी चुदासी औरत की चूत का पानी निकालने के लिए बहुत ही मस्त है।

चलो मैं सीधे कहानी पर आती हूँ।

मेरा नाम राज है, मैं आगरा का रहने वाला हूँ लेकिन जॉब की वजह से दिल्ली में रहता हूँ।
मैं एक हैंडसम लड़का हूँ, मेरी लंबाई 5.7 फ़ीट है, रंग ठीक है मेरे लंड का साइज बहुत लंबा है जो किसी की भी चूत फाड़ सकता है।

आप सभी लड़के मुठ मारने और लड़कियां अपनी चूत में उंगली करने को तैयार हो जाएँ।

बात उस समय की है जब मैं दिल्ली में जॉब करता था, मेरी उम्र 25साल थी, मैं दिल्ली में नया था, मैं एक सॉफ्टवेयर क्लास में सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग देता था। उसमें काफी लड़के लड़कियाँ थे।

उनमें से एक शालू नाम की लड़की थी जिसके पीछे पूरा क्लास बैच पागल था, उसका फिगर साइज 34 30 34 होगा जिसे देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

मैं उसे चोदने के सपने देखने लगा और वो भी शायद मुझसे चुदवाने को उतनी ही उतावली थी जितना मैं!
एक दिन की बात है, उसका बर्थडे था तो उस दिन उसने कोचिंग में पार्टी रखी।
मैं उस दिन लेट पहुंचा था क्योंकि मैंने दूसरी कम्पनी में जॉब के लिए अप्लाई किया था तो वहाँ जाना था, मैं लेट हो गया था।

मैं जब तक पहुंचा, पार्टी लगभग खत्म हो चुकी थी तो शालू मुझे देख के मेरे पास आई, बोली- सर आप कहाँ थे? मैं आपका कब से वेट कर रही थी और आप हो कि पार्टी ख़त्म होने के बाद आये हो?

मैं बोला- सॉरी शालू, एक अर्जेंट काम था इसलिए लेट हो गया! चलो कोई नहीं, फिर कभी दे देना पार्टी!
तो वो बोली- आज आप मेरे घर पर आ जाना, वहाँ सबके साथ पार्टी दूंगी घर पर!
मैंने कहा- कोई नहीं, बाद में दे देना!
वो जिद करने लगी तो मैं बोला- ठीक है, आ जाऊँगा।

और शाम को मैं तैयार होकर उसके घर पहुंचा तो मैंने देखा उसके घर पर कोई नही था, वो बिल्कुल अकेली थी।
मैंने पूछा- सब लोग कहाँ हैं?

तो बोली- सभी बहार गये है कल शाम तक आएंगे।

मैं वापस आने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- कहाँ जा रहे हो सर?
तो मैं बोला- घर जा रहा हूँ, तुम्हारे घर पर तो कोई नहीं है!

वो बोली- कोई है नहीं, तभी तो आपको घर पर बुलाया है!

मैं बोला- क्या मतलब?

बोली- राज आई लव यू!

मैं बोला- यह क्या बोल रही हो? मैं तुम्हारा टीचर हूँ!
तो वो बोली- आप कोचिंग सेंटर में टीचर हो, यहाँ तो मेरे लवर हो!

मैंने मना किया तो उसने मुझे अपनी कसम दी और बोली- ओ के, लवर मत मनो! लेकिन डिनर कर के जाना!
मैं बोला- ओके!

वो मुझे टेबल पर बिठा कर किचन में गई, खाना लेकर आई और मुझे परोस के खुद भी खाने लगी।
हम दोनों खाना खाने लगे।

फिर मैंने महसूस किया कि शालू का पैर मेरे पैर पर रगड़ रहा है, मैं समझ गया कि आज यह लड़की चुदवाने के मूड में है।

तो मैं भी मौके का फायदा उठा कर उसे वैसे ही गर्म करने लगा।

थोड़ी देर में वो गर्म हो गई।

हमने जल्दी से खाना खत्म किया और मैं उसे उठा कर बेडरूम में ले गया और उसके होंठो को अपने होंठों मे लेकर चूसने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी।

होंठ चूसते चूसते हम कब नंगे हो गए, पता नहीं चला। वो सिर्फ ब्रा पेंटी में ही रह गई, मैं उसकी ब्रा खोल कर उसके बूब्स चूसने लगा और वो अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगी।

फिर हम 69 पोजीशन में आ गए, वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत चाट रहा था। थोड़ी देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे हैं!

मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए बोला, वो घोड़ी बन गई और मैं अपना लंड उसकी चूत पर रखकर आगे पीछे करने लगा।

वो बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… राज तड़पाओ मत, अंदर डाल दो !

मैंने भी ज्यादा देर न करते हुए जोर से झटका मारते हुए लंड उसकी चूत में उतार दिया।

वो जोर से चिल्लाने लगी, उसे बहुत दर्द हुआ, मैंने बिना दर्द की परवाह किये चुदाई चालू रखी।

पंद्रह मिनट तक उसकी चूत की चुदाई की और वो मजा लेकर चुदवाती रही और झड़ गई।
उसने मेरा लंड अपनी चूत से निकाला और चूसने लगी।

दस मिनट तक फिर से वो तैयार हो गई चुदने को!
मैंने फिर उसकी चूत काफ़ी देर लगातार चोदी, उसमें वो फ़िर झड़ गई, फिर उसने मेरा लंड चूस कर मेरा पानी निकाला।
उस रात में उसके चार बार अपनी चूत की चुदाई करवाई।
दोस्तो, आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।
Continue Reading »